रायपुर -मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्पष्ट कहा है कि उनकी सरकार अवैध धर्म परिवर्तन को रोकने हेतु छत्तीसगढ़ में एक नया सख्त कानून लाने की तैयारी में है  ।

उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि सरकार अवैध धर्मांतरण रोकने के लिए सख्त कानून लाएगी, और मौजूदा कानून (छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 1968) में और प्राधिकरण जोड़े जा रहे हैं  ।

उन्होंने विधानसभा में कहा कि विदेशी धन द्वारा संचालित NGO की फंडिंग की कड़ी समीक्षा चल रही है और कुछ NGO पर मान्यता रद्द कर दी गई है  ।

ड्राफ्ट बिल के मुख्य प्रावधान (Draft Bill प्रमुख बातें)

यह बिल छत्तीसगढ़ गैरकानूनी धार्मिक रूपांतरण निषेध विधेयक नाम से जाना जा रहा है, और इसमें कई राज्यों (मध्य प्रदेश, यूपी, हरियाणा) के कानूनों का अध्ययन करने के बाद लगभग 17 पॉइंट्स शामिल किए गए हैं  ।

धर्म परिवर्तन से कम से कम 60 दिन पहले जिला प्रशासन (DM) को एक फॉर्म में जानकारी पूर्व जमा करनी होगी, जिसमें कारण विवरण सहित इरादे बताए जाएंगे  ।

प्रलोभन, विवाह, जोर-जबरदस्ती या कपटपूर्ण प्रभाव से धर्मांतरण को अवैध माना जाएगा, और सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने तक DM नोटिस बोर्ड पर विवरण प्रकाशित करेंगे  ।



परिजनों की आपत्ति पर FIR दर्ज की जा सकती है (गैर-जमानती मामला), सजा और मुआवजा के प्रावधान भी हैं – जेल की अवधि 2 से 10 साल, जुर्माना ₹25,000 से ₹50,000, और पीड़ित को ₹5 लाख तक का मुआवजा मिल सकता है  ।

उत्तरार्ध में दोष सिद्ध करने की जिम्मेदारी धर्मांतरण कराने वाले व्यक्ति पर होगी  ।

यह अधिनियम फिर से अपने धर्म में लौटने (घर वापसी) के मामलों पर लागू नहीं होगा  ।

मुख्य उद्देश्य अवैध धर्म परिवर्तन को रोकना, स्थानीय सामाजिक संरचना बनाए रखना, और धर्मांतरण प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना है। इसके लिए सूचना, न्यायिक प्रक्रिया और क़ानूनी प्रवर्तन को विधेयक में शामिल किया गया है।

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