
कोरिया। राजस्व मामलों के निपटारे में लेटलतीफी और लापरवाही पर कलेक्टर रोक्तिमा यादव ने कड़ा रुख अपनाया है। जिला कार्यालय में आयोजित राजस्व अधिकारियों की समीक्षा बैठक में उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि आम जनता के काम में ढिलाई किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। समय-सीमा के बाद भी पेंडिंग मामलों और पटवारियों द्वारा लंबे समय तक प्रतिवेदन (रिपोर्ट) दबाकर रखने पर कलेक्टर ने गंभीर नाराजगी जताई। उन्होंने ऐसे सभी लापरवाह पटवारियों की सूची बनाकर उनके खिलाफ तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रस्ताव पेश करने के निर्देश दिए हैं।
आम जनता को राहत: अब पटवारी दफ्तर में ही जमा होंगे अविवादित नामांतरण-बंटवारा के आवेदन
कलेक्टर ने आम नागरिकों को दफ्तरों के चक्कर काटने से बचाने के लिए प्रक्रिया को बेहद सरल और जनहितैषी बनाने का बड़ा फैसला लिया है। अब अविवादित नामांतरण और बंटवारा के आवेदन सीधे संबंधित पटवारी कार्यालय में जमा होंगे। पटवारी खुद जांच रिपोर्ट तैयार कर सीधे राजस्व न्यायालय को भेजेंगे, जिससे फाइलों का निपटारा तेजी से और पारदर्शी तरीके से हो सकेगा।
कलेक्टर के कड़े निर्देश और बड़े फैसले:
सोमवार को रहना होगा हाजिर: आम जनता और ग्रामीणों की सहूलियत के लिए अब हर सोमवार को सभी पटवारियों और राजस्व निरीक्षकों (RI) को अनिवार्य रूप से अपने-अपने मुख्यालय में मौजूद रहना होगा।
सीमांकन पर गाइडलाइन: वर्षा ऋतु को देखते हुए गैर-कृषि और खाली जमीनों का सीमांकन तुरंत होगा, जबकि खड़ी फसल वाले खेतों का सीमांकन 15 अक्टूबर के बाद किया जाएगा।
ई-कोर्ट से अनिवार्य पंजीयन: सभी अविवादित और विवादित मामलों का ई-कोर्ट प्रणाली के जरिए अनिवार्य पंजीयन कर समय पर फैसला सुनाने के निर्देश दिए गए।
अधिकारियों को फील्ड पर उतरने के आदेश: हर 15 दिन में पटवारियों के कामकाज की समीक्षा होगी। दोनों अपर कलेक्टरों को हर महीने सभी तहसीलों का औचक निरीक्षण कर राजस्व अदालतों की कार्यप्रणाली पर रिपोर्ट सौंपनी होगी।
कलेक्टर ने नक्शा बटांकन, स्वामित्व योजना और एग्रीस्टैक पंजीयन की धीमी रफ्तार पर भी असंतोष जताया और इन्हें प्राथमिकता से पूरा करने को कहा। उन्होंने दोटूक कहा कि राजस्व विभाग सीधे जनता से जुड़ा है, इसलिए हर कर्मचारी को संवेदनशीलता और जवाबदेही से काम करना होगा, वरना सख्त एक्शन के लिए तैयार रहें।
