खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में राज्य सरकार द्वारा लागू की गई बेहतर समर्थन मूल्य व्यवस्था और किसानों के हित में लिए गए ऐतिहासिक निर्णयों का सकारात्मक प्रभाव जिले में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रति एकड़ 21 क्विंटल तक धान खरीदी तथा 3100 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य ने किसानों को आर्थिक सुरक्षा, सम्मान और नई ऊर्जा प्रदान की है। भुगतान सीधे बैंक खातों में पहुंचने से पारदर्शिता और त्वरित लाभ सुनिश्चित हुआ है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में रफ्तार आई है।




25 उपार्जन केन्द्रों में आज की खरीदी सुचारू और सफल

जिले के 25 उपार्जन केंद्रों से प्राप्त विवरण के अनुसार आज कुल 273 टोकन दर्ज किए गए, जिनमें

समिति द्वारा जारी टोकन : 240

टोकन ऐप द्वारा जारी टोकन : 33


ध्यान खरीदी का विवरण—

समिति द्वारा खरीदी : 11,526.20 क्विंटल

टोकन ऐप द्वारा खरीदी : 1,706.00 क्विंटल


इस प्रकार आज जिले में कुल 13,232.20 क्विंटल धान खरीदा गया।




उपार्जन केन्द्रवार खरीदी का विवरण

कछौड़ – 11 टोकन, 450.00 क्विंटल

कमर्जी – 7 टोकन, 355.20 क्विंटल

केल्हारी – 23 टोकन, 937.20 क्विंटल

कोटाडोल – 11 टोकन, 388.00 क्विंटल

रापा – 3 टोकन, 190.00 क्विंटल

कटकोना – 10 टोकन, 531.60 क्विंटल

कोड़ा – 14 टोकन, 820.20 क्विंटल

कौड़ीमार – 752.80 क्विंटल

खड़गवां – 17 टोकन, 772.20 क्विंटल

बरदर – 12 टोकन, 601.60 क्विंटल

रतनपुर – 10 टोकन, 341.20 क्विंटल

सिंगहत – 5 टोकन, 241.20 क्विंटल

कंजिया – 6 टोकन, 384.80 क्विंटल

कुंवारपुर – 6 टोकन, 441.20 क्विंटल

घुटरा – 9 टोकन, 284.80 क्विंटल

कठौतिया – 6 टोकन, 300.80 क्विंटल

चैनपुर – 8 टोकन, 469.20 क्विंटल

बंजी – 9 टोकन, 512.60 क्विंटल

जनकपुर – 17 टोकन, 902.40 क्विंटल

बनारसी – 6 टोकन, 412.00 क्विंटल

डोडकी – 14 टोकन, 522.60 क्विंटल

नागपुर – 11 टोकन, 429.60 क्विंटल

बरबसपुर – 9 टोकन, 444.80 क्विंटल

माडीसरई – 17 टोकन, 912.00 क्विंटल

सिंगरौली – 16 टोकन, 812.20 क्विंटल





कृषि नीति से ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सकारात्मक परिवर्तन

धान खरीदी की यह पारदर्शी और व्यवस्थित प्रक्रिया दर्शाती है कि राज्य सरकार की कृषि नीतियाँ केवल घोषणाएँ नहीं, बल्कि जमीन पर प्रभावी रूप से लागू हो रही हैं।

खरीदी प्रक्रिया की दक्षता

टोकन प्रणाली की विश्वसनीयता

भुगतान की पारदर्शिता

प्रशासन की सक्रियता


इन सभी कारकों के चलते किसानों के जीवन में स्थायी आर्थिक मजबूती आई है। कृषि उपकरणों की खरीद बढ़ी है, ग्रामीण बाजारों में गतिविधियां तेज हुई हैं और किसान की मेहनत अब उसके सम्मान और समृद्धि में सीधे रूपांतरित हो रही है।

मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिला आज कृषि विकास के एक नए स्वर्णिम अध्याय की ओर बढ़ रहा है, जहाँ किसान ही विकास यात्रा का मुख्य केंद्र बनकर उभर रहा है।

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