भाईचारे की धड़कन है मनेंद्रगढ़ की तहज़ीब


मनेंद्रगढ़ : एक शहर, अनेक परंपराएँ, एक दिल


जहाँ अजमुद्दीन, यूसुफ और जहीर लिख रहे हैं सौहार्द की नई इबारत





राकेश मेघानी, News7x24 मनेंद्रगढ़

देश में जहां एक तरफ धर्म और आस्था को लेकर विवाद और टकराव की ख़बरें सुर्खियों में बनी रहती हैं, वहीं छत्तीसगढ़ का एक  शहर मनेंद्रगढ़ अपनी तहज़ीब से पुरे देश को एक अच्छा संदेश दे रहा है।

मनेन्द्रगढ़ शहर साबित करता है कि भारत की असली आत्मा विवादों में नहीं, बल्कि भाईचारे और सांप्रदायिक सौहार्द में बसती है। विविधता में एकता, भाईचारा, आपसी सौहाद्र हमारे देश के लिए सम्मान है

आस्था और प्रेम धर्म की सीमाओं से कहीं ऊपर

मनेंद्रगढ़ में तीन मुस्लिम अजमुद्दीन अंसारी,जहिर खान और यूसुफ मेमन वर्षों से हिंदू की आस्था का सम्मान करते हुए परम्पराओ को निभाकर समाज को जोड़ने के लिए एक मिशाल हैं।

अजमुद्दीन अंसारी बीते 8-9 सालों से वार्ड-8 सरोवर मार्ग मनेन्द्रगढ़ में गरबा का आयोजन कराते हैं।

यूसुफ मेमन पिछले दो दशकों से अपने वार्ड में देवी माँ की प्रतिमा स्थापना और आरती में शामिल होते हैं।

जहीर खान लगातार तीन दशक से अधिक समय से रावण दहन की परंपरा निभा रहे हैं।

अजीमुद्दीन अंसारी




मनेंद्रगढ़ में गरबा : सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल

मनेंद्रगढ़ का गरबा आयोजन आज पूरे शहर के लिए भाईचारे का मंच बन चुका है। यहाँ आयोजनकर्ता मुस्लिम समुदाय से हैं, लेकिन पंडाल में हिंदू और मुस्लिम परिवार मिलकर डांडिया खेलते हैं, गीत-संगीत गूंजता है और सभी परंपराएँ पूरी श्रद्धा के साथ निभाई जाती हैं।

मुस्लिम आयोजक होने के कारण उन्हें हर साल प्रशासन से अलग से अनुमति लेनी पड़ती है, लेकिन वे इसे रुकावट नहीं, बल्कि सौहार्द का अवसर मानते हैं। उनका मानना है कि हमारा आयोजन गरबा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि ऐसा सांस्कृतिक पर्व है जो हिंदू-मुस्लिम की दीवारें तोड़कर सबको एक करता है।

युसूफ मेमन





यूसुफ मेमन (‘बल्लू’) : दो दशकों से परम्परा को आगे बढ़ाते हुए एक मिशाल बन गए

यूसुफ दो दशकों से परंपरा को आगे बढ़ाते हुए हर साल देवी माँ की प्रतिमा स्थापना से नवरात्रि के नौ दिनों तक सुबह-शाम आरती में शरीक होते हैं। उनके लिए यह महज़ आयोजन नहीं बल्कि व्यक्तिगत श्रद्धा और सामुदायिक आस्था का प्रतीक है। समाज के लिए एक मिशाल है..युसूफ मेमन

जहीर खान



जहिर खान : 40 सालों से रावण दहन में बड़ी भूमिका

मनेंद्रगढ़ में सांस्कृतिक आयोजन रावण दहन में जहीर खान का नाम आगे आता है। वे पिछले चार दशकों से शहर के एक आयोजन रावण दहन में बड़ी और मुख्य भूमिका निभाते हैं। रावण का पुतला तैयार होने से लेकर रावण दहन तक इनकी देख रेख, हर जिम्मेदारी में इनकी बड़ी भूमिका  है।

उनकी यह परंपरा साफ़ संदेश देती है कि बुराई किसी मज़हब की नहीं होती, और अच्छाई पर सभी का समान अधिकार है।

मनेंद्रगढ़ : भाईचारे का ज़िंदा संदेश

अजमुद्दीन अंसारी, यूसुफ मेमन और जहीर खान की पहल हमें सिखाती है कि बुराई किसी विशेष धर्म में नहीं होती और अच्छाई हर धर्म में होती है।
मनेंद्रगढ़ की यह कहानी उन सभी विवादों को जवाब देती है जो समाज में नफ़रत बोते हैं।
यह शहर बताता है कि भारत की ताक़त उसकी विविधता में एकता है, और उसका दिल सांप्रदायिक सौहार्द में धड़कता है।

आपसी भाईचारे का संदेश हर मजहब के लोग सभी त्यौहार में शरीक होते है

मनेंद्रगढ़ शहर अनेकता में एकता का जीतता जाता उदाहरण है इस शहर में विभिन्न जाति, धर्म, वर्ग, समुदाय के लोग है जो सभी के त्योहारों में शरीक होते है एक दुशरे के घर बुलाते है बधाई शुभकामनायें देते है मिलकर त्यौहार मनाते है मनेन्द्रगढ़ में अजमुद्दीन अंसारी, यूसुफ मेमन और जहीर खान ने अपनी ऐसी पहल से यह साबित कर दिया है कि बुराई किसी धर्म की पहचान नहीं होती, और अच्छाई हर मज़हब में रची-बसी होती है।

यह शहर उन सभी विवादों को सीधा जवाब देता है जो समाज में नफ़रत और विभाजन बोने की कोशिश करते हैं।

मनेंद्रगढ़ बताता है कि भारत की सबसे बड़ी ताक़त उसकी विविधता में छिपी एकता है, और उसका दिल हमेशा आपसी प्रेम धड़कनों से ज़िंदा रहता है।

जहीर खान श्री राम (पात्र ) को कंधे में बैठाकर स्थल तक ले जाते हुए
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