कोरिया, 13 अगस्त 2025
कोरिया जिले की एसईसीएल चरचा कोयला खदान, जो कभी देश की प्रमुख और समृद्ध खदानों में गिनी जाती थी, अब भविष्य की अनिश्चितताओं से जूझ रही है। बीते 61 वर्षों में यहाँ से लगभग साढ़े सात करोड़ टन कोयला निकाला गया, जिसकी अनुमानित कीमत करीब ₹25,000 करोड़ है।



कभी यहाँ 3,600 कर्मचारी कार्यरत थे, लेकिन आज केवल 1,600 कर्मचारी बचे हैं। पिछले 35 वर्षों से भर्ती बंद है, जिससे स्थानीय युवाओं में बेरोजगारी का संकट गहराता जा रहा है। नागरिकों को आशंका है कि आने वाले 5 से 7 वर्षों में खदान पूरी तरह बंद हो सकती है, जिसके परिणामस्वरूप रोजगार के अवसर और भी कम होंगे और पलायन बढ़ेगा।

स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों ने सरकार और प्रबंधन से पंचवटी विश्रामगृह से कटगोड़ी तक सड़क निर्माण और कोयला आधारित उद्योगों की स्थापना की मांग की है, ताकि क्षेत्र में रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को गति मिल सके। व्यापारियों का कहना है कि मार्केट का केवल 20% कारोबार ही बचा है, लेकिन सड़क बनने से व्यापार में सुधार और रोज़गार के अवसर बढ़ेंगे।

लोग उम्मीद कर रहे हैं कि सरकार और कंपनी समय रहते ठोस कदम उठाए, ताकि चरचा खदान क्षेत्र को स्थायित्व और भविष्य की गारंटी मिल सके।

चर्चा कोयला खदान, जिसे चरचा आरओ भूमिगत कोयला खदान परियोजना के रूप में भी जाना जाता है, छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले के बैकुंठपुर तहसील में स्थित है। यह खदान 3590.147 हेक्टेयर के खनन पट्टा क्षेत्र में फैली हुई है, जिसमें 2.10 मिलियन टन प्रति वर्ष की डिज़ाइन क्षमता है.
चर्चा कोयला खदान के बारे में कुछ मुख्य बातें:

स्थान: छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले के बैकुंठपुर तहसील के सारडी और शिवपुर गाँवों में.

संचालन: साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) द्वारा संचालित.


इतिहास: परियोजना ने 17 फरवरी, 1995 को अपनी पर्यावरणीय स्वीकृति प्राप्त की और 3 मई, 2012 को 0.6 मिलियन टन प्रति वर्ष से 2.10 मिलियन टन प्रति वर्ष तक विस्तार के लिए पर्यावरणीय मंजूरी प्राप्त की, ग्लोबल एनर्जी मॉनिटर के अनुसार.
हालिया घटना: 2016 में, भूमिगत खदानों से कोयला ले जाने वाली रिसीवर बेल्ट के टूटने के कारण चार दिनों से अधिक समय तक उत्पादन बंद रहा था.

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