पुरानी यादों का सैलाब : मनेन्द्रगढ़ से मेलबर्न तक खिंचे चले आए ‘शिशु मंदिर’ के यार

मनेंद्रगढ़।
स्कूल की प्रार्थना सभा, कक्षा में बैठकर पढ़ाई करना, साथ बैठकर टिफिन साझा करना और छोटी-छोटी शरारतों से भरा बचपन—समय के साथ सब पीछे छूट गया, लेकिन यादों की गठरी आज भी उतनी ही भारी है। इसी एहसास को फिर से जीने का अवसर मिला जब सरस्वती शिशु मंदिर, मनेंद्रगढ़ के 2006 बैच के छात्र-छात्राएं करीब दो दशक बाद एक-दूसरे से मिले।

रविवार को राजधानी रायपुर स्थित पैपीलॉन स्टे फार्म में आयोजित इस मिलन समारोह में जैसे ही पुराने दोस्त आमने-सामने आए, गले मिलने के साथ ही आंखें नम हो गईं। चेहरे बदल गए थे, लेकिन रिश्तों की गर्माहट वही थी।
सात समंदर पार से भी खिंचे चले आए बचपन के दोस्त
इस रीयूनियन की सबसे खास बात यह रही कि दोस्ती के आगे दूरी बौनी साबित हुई।

ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न से नेहा सिंह विशेष रूप से इस मिलन में शामिल होने पहुंचीं। भावुक होते हुए उन्होंने कहा—
“देश छूट गया, शहर छूट गए, लेकिन जिन दोस्तों के साथ क-ख-ग-घ सीखा, उनकी यादें कभी नहीं छूटीं।”
वहीं बेंगलुरु से अंकिता मजूमदार और कुणाल मजूमदार, तथा दिल्ली से शिप्रा तिवारी सहित देश के अलग-अलग हिस्सों से साथी इस अवसर पर जुटे।

व्हाट्सएप ग्रुप से शुरू हुआ सफर, रीयूनियन में बदला सपना
करीब 30 साथियों ने व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए एक-दूसरे से संपर्क बनाए रखा और इसी डिजिटल मंच से इस रीयूनियन की नींव पड़ी।
आज कोई डॉक्टर है, कोई इंजीनियर, कोई पत्रकार तो कोई व्यवसायी—लेकिन इस आयोजन में सभी फिर से ‘स्कूल के छात्र’ बन गए।
ढोल-ताशों के साथ स्वागत, यादों की खुली पोटली
कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक ढोल-ताशों और मोतियों की माला पहनाकर स्वागत के साथ हुई।
दिन भर स्कूल लाइफ के किस्से, हंसी-ठिठोली और पुरानी शरारतों की बातें चलती रहीं।
दो दिवसीय आयोजन का समापन ग्रुप फोटो, मोमेंटो और उपहार वितरण के साथ हुआ—यादों को कैमरे और दिलों में हमेशा के लिए कैद करते हुए।
इन दोस्तों ने साझा किए अपने भाव
मनोज नागपुरे:
“20 साल बाद दोस्तों से मिलना किसी सपने के सच होने जैसा है। स्कूल की यादें आज भी हमारी सबसे बड़ी पूंजी हैं।”
राहुल तिवारी:
“दूरी चाहे जितनी हो, बचपन की दोस्ती का खिंचाव हमेशा हमें जोड़ ही देता है।”
रविकांत सिंह राजपूत:
“सरस्वती शिशु मंदिर के संस्कार और दोस्तों का साथ—आज हम जो हैं, उसी की देन है।”
साकेत गोयल:
“व्हाट्सएप पर शुरू हुआ यह विचार आज हकीकत बन गया। साथियों की सफलता देखकर गर्व होता है।”
गौरव त्रिपाठी:
“भागदौड़ भरी जिंदगी में ये दो दिन नई ऊर्जा देकर गए। यह दोस्ती का सफर अब कभी नहीं रुकेगा।”
मिलन में शामिल रहे ये साथी
साकेत गोयल, सतीश गुप्ता, पंकज जैन, रवि तल्लानी, चंद्रशेखर तिवारी, राजेश चोपड़ा, नेहा सिंह, नेहा सरकार, समीर आलम, अंकित अग्रवाल, अंकिता मजूमदार, कुणाल मजूमदार, आयुष पटेल, शिप्रा तिवारी, हर्ष अहिरवार, मनीष बरियार, प्रतीक नायक, गौरव त्रिपाठी, मनीष सिंह, सोनू सिंह, मनोज नागपुरे, राकेश पासवान, दीपक तोमर, रविकांत सिंह, दीपक साहू एवं राहुल तिवारी।
