मनेन्द्रगढ़। शहर के मुख्य मार्ग तहसील से बस स्टॉप रोड तक सड़क किनारे लगे पेड़ों की कटाई के दौरान वन विभाग द्वारा सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जा रही है। कटाई स्थल पर न तो सुरक्षा चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं और न ही यातायात रोकने के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। परिणामस्वरूप, दिन के समय सरपट दौड़ते वाहन और पैदल राहगीरों के बीच ही भारी-भरकम पेड़ों की कटाई का कार्य जारी है। यह लापरवाही कभी भी किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।कटाई के दौरान स्कूल के भवनों पर पेड़ों की डगालें गिराई जा रही हैं, जिससे भवनों को क्षति पहुंचने की संभावना बनी हुई है। स्कूल प्रबंधन के एक शिक्षक ने बताया कि पेड़ काटने के लिए वर्षों से आवेदन दिए जा रहे थे। अब जाकर वन विभाग की टीम पहुंची है, पर सुरक्षा उपायों की कमी से स्थिति चिंताजनक बन गई है।वन विभाग की उदासीनता भी स्पष्ट रूप से सामने आई है। मनेन्द्रगढ़ वन परिक्षेत्र अधिकारी से संपर्क करने के लिए कई बार कॉल किए गए, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। संबंधित अधिकारी का यह रवैया विभाग की जिम्मेदारी के प्रति गंभीरता पर सवाल खड़ा करता है।

यातायात रोकने के पुख्ता इंतजाम नहीं

इस मामले में जिला शिक्षा अधिकारी आर. पी. मिरे ने कहा कि यदि पेड़ों की कटाई के दौरान किसी भवन को नुकसान होता है तो उसकी जांच नगर पालिका के अधिकारी करेंगे। वहीं मुख्य नगर पालिका अधिकारी इसहाक खान का कहना है कि इस कार्य में नगर पालिका की कोई भूमिका नहीं है, क्योंकि नगर पालिका नें न भवन बनाए है न पेड़ कटवा रही है पेड़ वन विभाग द्वारा कटवाए जा रहे हैं। एसडीएम साहब की निगरानी में यह कार्य हो रहा है

कटाई स्थल  सुरक्षा चेतावनी बोर्ड नहीं है

विभागों के बीच इस तरह की जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने की प्रवृत्ति से यह स्पष्ट है कि यदि कोई अप्रिय घटना होती है, तो जिम्मेदारी तय करना कठिन हो जाएगा। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में कब और कैसे संज्ञान लेता है।

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