मयंक अग्रवाल का 50वाँ रक्तदान, समाज के लिए बने प्रेरणा स्त्रोत

मनेन्द्रगढ़/एम सी बी
समाज सेवा की भावना को साकार करते हुए मयंक अग्रवाल, आत्मज श्री कमलेश अग्रवाल (संचालक – मयंक टेंट हाउस), ने आज अपना 50वाँ रक्तदान सफलतापूर्वक संपन्न किया। यह उपलब्धि न केवल एक व्यक्तिगत संकल्प का प्रमाण है, बल्कि समाज और युवाओं के लिए एक सशक्त प्रेरणा भी है।

37 वर्षीय मयंक अग्रवाल वर्तमान में आईडीएफ़सी बैंक, रायपुर में कार्यरत हैं। अपने व्यस्त पेशेवर जीवन के बावजूद उन्होंने निरंतर रक्तदान कर यह सिद्ध किया है कि सेवा के लिए समय और इच्छाशक्ति दोनों निकाले जा सकते हैं। उनका यह योगदान अब तक अनेक जरूरतमंद मरीजों के लिए जीवन रक्षक साबित हुआ है।
मयंक अग्रवाल ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2008 में पहली बार रक्तदान किया था। उस समय मन में थोड़ा डर था, लेकिन जब उनके एक मित्र के दादाजी को रक्तदान के बाद स्वस्थ होते देखा, तो उनकी सोच पूरी तरह बदल गई। उसी क्षण उन्होंने यह ठान लिया कि जब भी अवसर मिलेगा और चिकित्सकीय रूप से 90 दिन की अवधि पूर्ण होगी, वे रक्तदान अवश्य करेंगे। तभी से वे लगातार हर तीन माह में रक्तदान करते आ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि अब रक्तदान उनके लिए किसी दायित्व से अधिक एक आत्मिक संतोष का माध्यम बन गया है। “जब यह एहसास होता है कि मेरे रक्त से किसी की जान बची है, तो वही सबसे बड़ा पुरस्कार है,” — ऐसा मानना है मयंक अग्रवाल का।
इस अवसर पर उपस्थित लोगों एवं विभिन्न सामाजिक संगठनों ने मयंक अग्रवाल की सराहना करते हुए उन्हें युवाओं के लिए प्रेरणा स्त्रोत बताया। सभी ने एक स्वर में कहा कि ऐसे रक्तदाताओं के कारण ही समाज में मानवता, संवेदना और सेवा की भावना जीवित रहती है।
रक्तदान महादान है, और मयंक अग्रवाल जैसे समर्पित रक्तदाताओं के प्रयास समाज को यह संदेश देते हैं कि एक छोटा सा कदम किसी के जीवन की सबसे बड़ी उम्मीद बन सकता है। उनका यह कार्य प्रत्येक युवा को आगे आकर रक्तदान करने की प्रेरणा देता है।
