
मनेन्द्रगढ़। आज के भौतिकवादी युग में जहाँ शादियों की सालगिरह और जन्मदिन जैसे आयोजनों पर लाखों रुपये पानी की तरह बहा दिए जाते हैं, वहीं मनेन्द्रगढ़ के एक प्रतिष्ठित व्यवसायी परिवार ने समाज के सामने मानवता की एक अनूठी मिसाल पेश की है। संपन्न व्यवसायी अमर चंद जैन एवं प्रेम लता जैन की 57वीं विवाह वर्षगाँठ के अवसर पर उनके पूरे परिवार ने ‘फिजूलखर्ची त्याग कर जीवन दान’ का संकल्प लिया।

एक साथ 17 सदस्यों ने किया रक्तदान: बनाया नया कीर्तिमान
अमर चंद जैन के परिवार के 17 सदस्यों ने एक ही दिन रक्तदान कर न केवल इस दिन को यादगार बनाया, बल्कि एक नया रिकॉर्ड भी स्थापित किया। इस मुहिम में केवल स्थानीय सदस्य ही नहीं, बल्कि देश के अलग-अलग शहरों में रह रहे परिवार के सदस्य भी शामिल हुए।

जयपुर में बड़ी बहु और पोते पोती ने किया रक्तदान : बड़ी बहू प्रवीणा जैन, बड़ी पोती हर्षिता और पोता अक्षय जैन जो वर्तमान में जयपुर में थे, उन्होंने वहीं रक्तदान कर इस उत्सव में अपनी भागीदारी दर्ज की
चंडीगढ़ में बेटी दामाद ने किया रक्तदान : बेटी आरती बैद और दामाद अजीत बैद ने चंडीगढ़ में रक्तदान कर अपने माता-पिता के प्रति कों शुभकामना उपहार दिया
तीन पीढ़ियों में संस्कारों की अविरल धारा: तीन पीढ़ियों का संकल्प….रक्तदान करने वालों में बेटे पंकज, प्रवीण, प्रदीप जैन; बहुएँ प्रवीणा, कविता, ललिता जैन; और पोते-पोतियां कुशाग्र, निपुण, अक्षय, हर्षिता, हितैषी, प्रार्थना व दृष्टि जैन शामिल रहे। केंद्रीय चिकित्सालय के ब्लड बैंक में जब पूरा परिवार एकजुट होकर रक्तदान कर रहा था, तो वहाँ मौजूद हर व्यक्ति इस दृश्य को देख इस कार्य की सराहना कर रहा था।

“हमें इस बात की बेहद खुशी है कि जो संस्कार हमने अपने बच्चों को दिए, वे अब उनकी अगली पीढ़ी में भी नजर आ रहे हैं। आज हमारी वर्षगाँठ इसलिए सार्थक हो गई क्योंकि हमारा परिवार किसी के जीवन को बचाने के काम आ सका।”
— अमर चंद जैन एवं प्रेम लता जैन
प्रेरणा बनी पहल: ‘पार्टी नहीं, पुण्य’
बड़े बेटे पंकज जैन ने बताया कि यह प्रेरणा उन्हें चेंबर ऑफ कॉमर्स के सुमित अग्रवाल और डॉ. लवलेश गुप्ता के उस निर्णय से मिली, जिसमें सदस्यों से विशेष अवसरों पर रक्तदान करने का आह्वान किया गया था। बच्चों ने इसी प्रेरणा को आत्मसात करते हुए दादा-दादी की वर्षगाँठ को ब्लड बैंक में मनाने का निर्णय लिया।

समाज को संदेश: क्यों जरूरी है यह पहल?
ब्लड बैंक में केक काटकर और रक्तदान कर इस परिवार ने स्पष्ट संदेश दिया है कि खुशियाँ बाँटने से बढ़ती हैं, और किसी जरूरतमंद की जान बचाना दुनिया का सबसे बड़ा उपहार है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, एक यूनिट रक्त तीन लोगों की जान बचा सकता है। जैन परिवार की इस पहल से समाज में यह जागरूकता आएगी कि:
रक्तदान से शरीर को कोई नुकसान नहीं होता, बल्कि यह स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है।
उत्सवों पर दिखावे के बजाय सामाजिक सरोकार अधिक संतोष देते हैं।
मनेन्द्रगढ़ का यह परिवार आज उन तमाम लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है जो समाज में सकारात्मक बदलाव लाना चाहते हैं। मानवता की इस सेवा के लिए पूरा शहर इस परिवार की सराहना कर रहा है।
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