50 साल पुरानी भारतीय डाकघर की रजिस्ट्री को अलविदा
“बाय… बाय… रजिस्ट्री!”

एमसीबी।
कभी हमारे रिश्तों, सरकारी दस्तावेज़ों और विश्वास का सबसे सस्ता और भरोसेमंद माध्यम रही भारतीय डाक की रजिस्ट्री सेवा अब इतिहास बनने जा रही है।
कागज़ पर लिखी चिट्ठी जब सात समंदर पार जाती थी, और जब डाकिया घंटी बजाकर दस्तक देता था — तो साथ लाता था भरोसा, अपनापन और एक दस्तावेजी गवाही।
लेकिन अब —
1 सितंबर 2025 से, भारत सरकार ने रजिस्ट्री सेवा को बंद करने का ऐलान कर दिया है। अब न तो आप कोई दस्तावेज़ रजिस्ट्री से भेज पाएंगे और न ही सस्ती दरों पर कानूनी नोटिस या सरकारी चिट्ठी।
अब क्या होगा?
एमसीबी निवासी अधिवक्ता संजय गुप्ता ने बताया कि
“डाक विभाग ने इस सेवा को अब स्पीड पोस्ट सेवा में विलीन कर दिया है। यानी जो 20 ग्राम की रजिस्ट्री पहले ₹26-₹27 में हो जाती थी, उसके लिए अब ₹41 चुकाने होंगे। लगभग 75% ज्यादा खर्च।”
मतलब, अब एक सस्ती और भरोसेमंद सेवा के लिए आम आदमी को अधिक पैसे चुकाने होंगे, और छोटे कस्बों व गांवों के लिए यह झटका जैसा है।
तकनीक ने बदला तरीका
ईमेल, व्हाट्सऐप, ऑनलाइन ट्रैकिंग, डिजिटल साइन — इन सबने जहां दुनिया को तेज़ बनाया, वहीं डाक की पुरानी सेवाएं पीछे छूट गईं।
फिर भी…
रजिस्ट्री सिर्फ एक सेवा नहीं थी, वो थी —
हमारे रिश्तों की चिट्ठी,
हमारे भविष्य के कागज़ात,
और अदालत की कानूनी गवाही।
तो आइए मिलकर कहें ———
“धन्यवाद रजिस्ट्री…
धन्यवाद भारतीय डाक…
अब वक्त है आपको बाय-बाय कहने का।”
