
बिलासपुर:साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) में ओवरमैन सर्टिफिकेट ऑफ कंपीटेंसी धारक तथा ओवरमैन पद के लिए पात्र विभागीय कर्मचारियों ने प्रबंधन की नीतियों पर गहरा असंतोष व्यक्त किया है। हिंद खदान मजदूर फेडरेशन के सहायक महासचिव अख़्तर जावेद उस्मानी के अनुसार, SECL प्रबंधन द्वारा वर्ष 1993 के कोल इंडिया लिमिटेड के रिवाइज्ड स्टाफ पैटर्न की अनदेखी की जा रही है।

सीधी भर्ती से वरिष्ठता प्रभावित
अख़्तर जावेद उस्मानी का आरोप है कि SECL में ओवरमैन के 272 रिक्त पदों पर पात्र विभागीय कर्मचारियों को पदोन्नत करने के बजाय सीधी भर्ती प्रक्रिया अपनाई गई है। नव-नियुक्त कर्मचारियों को ‘जूनियर ओवरमैन’ पदनाम देकर नियुक्त किया गया है, जिससे वर्षों से कार्यरत विभागीय कर्मचारियों की वरिष्ठता का उल्लंघन हुआ है और उनकी पदोन्नति के मार्ग बंद हो गए हैं।

प्रमुख मांगें और आपत्तियां:
मैनपावर बजट की विसंगति: नियमों के अनुसार 3 वर्ष के अनुभव वाले डिप्लोमा/डिग्री धारक व ओवरमैन सर्टिफिकेट धारक कर्मचारी पदोन्नति के पात्र हैं। इसके बावजूद मैनपावर बजट में उनके लिए रिक्तियां सृजित नहीं की गईं।

अनुभव की शर्त व उपेक्षा: माइनिंग सरदार से ‘प्रोडक्शन कम सेफ्टी असिस्टेंट’ बनने के लिए 10 वर्ष का अनुभव अनिवार्य किया गया, लेकिन ओवरमैन पद की चयन प्रक्रिया से फील्ड के माइनिंग सरदारों को बाहर रखा गया।
वरिष्ठता सूची पर पत्राचार: 02 जनवरी 2026 को उस्मानी ने SECL प्रबंधन को पत्र भेजकर विभागीय डिप्लोमा/डिग्री धारकों की इंटर-से सीनियरिटी बनाए रखने की मांग की थी, जिसका कोई उत्तर नहीं मिला।

उत्पादन पर असर की आशंका
फेडरेशन ने SECL की कमिटी ऑफ फंक्शनल डायरेक्टर्स को पत्र प्रेषित कर अवगत कराया है कि कर्मचारियों के वर्षों के परिश्रम और योगदान की उपेक्षा से उनमें भारी निराशा है, जिससे कोयला उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
प्रबंधन से अपील
हिंद खदान मजदूर फेडरेशन ने मांग की है कि रिवाइज्ड स्टाफिंग पैटर्न के तहत 3 साल का अनुभव और ओवरमैन सर्टिफिकेट ऑफ कंपीटेंसी रखने वाले सभी माइनिंग सरदारों को तुरंत ‘ओवरमैन टेक्निकल एंड सुपरवाइजरी ग्रेड-बी’ के पद पर पदोन्नत किया जाए।
