विनय शंकर सिंह पूर्व जनपद अध्यक्ष मनेन्द्रगढ़


मनेंद्रगढ़। छत्तीसगढ़ में धान खरीदी प्रक्रिया में आ रही बाधाओं को लेकर किसानों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। पूर्व जनपद अध्यक्ष मनेन्द्रगढ़ डॉ. विनय शंकर सिंह ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि धान खरीदी बंद कर और बार-बार नियम बदलकर किसानों को मानसिक व आर्थिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।
डॉ. सिंह ने कहा कि खेत में पसीना किसान बहाता है, बीज, खाद, पानी और मेहनत किसान लगाता है, लेकिन जब फसल बेचने का समय आता है तो खरीदी केंद्रों के दरवाजे बंद मिलते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यही किसान-हितैषी सरकार की पहचान है?
उन्होंने आरोप लगाया कि कभी गिरदावरी, कभी पोर्टल, कभी भौतिक सत्यापन और कभी सर्वर का बहाना बनाकर किसानों को लगातार परेशान किया जा रहा है। कई किसानों की गिरदावरी होने के बावजूद पोर्टल में फसल प्रविष्टि शून्य कर दी गई, जिससे टोकन कटवाने के समय उन्हें खरीदी केंद्रों से लौटना पड़ा। इसके बाद किसानों को दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
डॉ. सिंह ने यह भी कहा कि बीते एक सप्ताह से एग्रीटेक पोर्टल बंद है, प्रति एकड़ धान खरीदी की मात्रा घटाई जा रही है और लघु व सीमांत किसानों को केवल एक बार टोकन देकर उनके साथ अन्याय किया जा रहा है। भौतिक सत्यापन के दौरान तीन अलग-अलग एंगल से फोटो लेने के बाद भी तय की गई क्विंटल मात्रा को खरीदी केंद्रों में अचानक कम कर दिया जा रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासनिक दबाव की श्रृंखला में सबसे ज्यादा मार किसान पर पड़ रही है। “पटवारी एसडीएम के दबाव में, एसडीएम कलेक्टर के दबाव में और कलेक्टर शासन के दबाव में काम कर रहे हैं, लेकिन इसका खामियाजा किसान भुगत रहा है,” उन्होंने कहा।
डॉ. सिंह ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि धान खरीदी नहीं हुई तो किसान कर्ज कैसे चुकाएगा, घर कैसे चलाएगा और बच्चों की पढ़ाई कैसे होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि छत्तीसगढ़ का किसान भीख नहीं, अपने हक का दाम मांग रहा है।
अंत में उन्होंने सरकार से तत्काल रकबे और टोकन के अनुसार किसान का सम्पूर्ण धान खरीदी शुरू करने, किसानों को परेशान करना बंद करने और भरोसा बहाल करने की मांग की। उन्होंने कहा कि किसान अब जाग रहा है और अपने हक के लिए जवाब मांग रहा है

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