
मनेन्द्रगढ़। शिक्षा, संस्कार और सेवा की परंपरा को सहेजते हुए सरस्वती शिशु मंदिर अपने 55 वर्षों के गौरवशाली इतिहास में पहली बार पूर्व छात्रों के भव्य सम्मेलन का साक्षी बनने जा रहा है। वर्ष 1970 में स्थापित इस विद्यालय के प्रांगण में 21 दिसम्बर 2025, रविवार को देश के विभिन्न राज्यों से आए पूर्व छात्र एक मंच पर एकत्र होकर अपनी स्मृतियों, उपलब्धियों और संस्कारों को साझा करेंगे।
इस ऐतिहासिक समागम में 1983 से 2005 तक अध्ययनरत रहे भैया-बहिन बड़ी संख्या में शामिल होंगे। विद्यालय से शिक्षा ग्रहण कर आज देश के विभिन्न क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा और सफलता की पहचान बना चुके पूर्व विद्यार्थी इस आयोजन की शोभा बढ़ाएंगे। यह समागम न केवल स्मृतियों का पुनर्मिलन होगा, बल्कि विद्यालय के संस्कारों और शिक्षा की शक्ति का जीवंत उदाहरण भी बनेगा।
कार्यक्रम की जानकारी देते हुए विद्यालय के प्राचार्य विनोद शुक्ला ने बताया कि सम्मेलन की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। पूर्व छात्रों के सहयोग से आयोजन की विस्तृत रूपरेखा तैयार की गई है। सम्मेलन का शुभारंभ सुबह 8 बजे होगा और यह शाम 6 बजे तक चलेगा। इस दौरान पूर्व एवं वर्तमान में कार्यरत आचार्यों का सम्मान किया जाएगा, साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रमों की मनोहारी प्रस्तुतियां होंगी।
कार्यक्रम की विशेष आकर्षण के रूप में शाम को घोष दल के साथ भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। यह शोभायात्रा भगत सिंह तिराहा, जैन मंदिर, गुरुद्वारा, विवेकानंद चौक एवं राम मंदिर से होकर विद्यालय परिसर में संपन्न होगी। नगरवासियों द्वारा जगह-जगह शोभायात्रा का स्वागत किया जाएगा तथा आयोजन को भव्य रूप देने के लिए स्वागत द्वार भी सजाए जा रहे हैं।
यह पूर्व छात्र सम्मेलन न केवल सरस्वती शिशु मंदिर परिवार के लिए गर्व का विषय है, बल्कि मनेन्द्रगढ़ नगर के लिए भी एक ऐतिहासिक और भावनात्मक क्षण होगा—जहाँ संस्कारों से गढ़ी पीढ़ियां एक बार फिर अपने विद्यालय के आंगन में एक-दूसरे से मिलेंगी।
