15 दिनों के भीतर भुगतान न होने पर आंदोलन की चेतावनी, पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने दिया समर्थन


मनेन्द्रगढ़।आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका संघ, छत्तीसगढ़ (एमसीबी जिला) द्वारा अपनी विभिन्न लंबित मांगों और समय पर मानदेय न मिलने की समस्या को लेकर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा गया। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि 15 दिनों के भीतर उनकी जायज मांगों को पूरा करते हुए लंबित भुगतान नहीं किया गया, तो वे उग्र धरना-प्रदर्शन और आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी महिला एवं बाल विकास विभाग की होगी।
मई-जून का मानदेय और 4 महीने से गरम भोजन की राशि लंबित
कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन में संघ ने बताया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को राज्यांश के ₹5,500 और केन्द्रांश के ₹4,500 मिलाकर कुल ₹10,000 प्रति माह मानदेय मिलता है। जिला स्तर पर राशि उपलब्ध होने के बावजूद समय पर इसका भुगतान नहीं किया जा रहा है। वर्तमान में मई और जून 2026 का मानदेय पूरी तरह लंबित है। इसके अलावा, मार्च 2026 से जून 2026 तक (कुल 4 माह) की गरम भोजन मद की राशि का भी भुगतान नहीं किया गया है।
अल्प मानदेय में परिवार का भरण-पोषण मुश्किल
कार्यकर्ताओं ने अपनी व्यथा व्यक्त करते हुए कहा कि एक तरफ उन्हें इस अल्प मानदेय में आंगनबाड़ी केन्द्रों का सुचारू संचालन करना पड़ता है और बच्चों के लिए व्यवस्थाएं जुटानी पड़ती हैं, वहीं दूसरी ओर समय पर मानदेय न मिलने से उनके स्वयं के परिवारों के सामने भरण-पोषण का गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
संघ की प्रमुख मांगें:
प्रत्येक माह की 1 से 5 तारीख के भीतर मानदेय का नियमित भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
मई और जून माह के लंबित मानदेय का तत्काल भुगतान हो।
मार्च से जून 2026 तक के गरम भोजन मद की बकाया राशि शीघ्र जारी की जाए।
आंगनबाड़ी बहनें जनकल्याणकारी योजनाओं की महत्वपूर्ण कड़ी: गुलाब कमरो
संघ के इस कदम को ट्रेड यूनियन कौंसिल छत्तीसगढ़ के प्रांताध्यक्ष एवं पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने अपना पूर्ण समर्थन दिया है। उन्होंने शासन और प्रशासन से मांग करते हुए कहा:
“आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका बहनें शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। वे जमीनी स्तर पर सरकार की योजनाओं को आम जनता तक पहुँचाती हैं। सरकार और जिला प्रशासन को यह प्राथमिकता से सुनिश्चित करना चाहिए कि इन बहनों को प्रत्येक माह समय पर मानदेय मिले, ताकि वे बिना किसी आर्थिक मानसिक तनाव के पूरी निष्ठा के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन कर सकें।”

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