कोरिया। प्रशासनिक व्यस्तताओं के बीच जब कोई शीर्ष अधिकारी स्कूलों में बच्चों के बीच पहुंचकर उनका शिक्षक और अभिभावक बन जाए, तो बच्चों का हौसला कई गुना बढ़ जाता है। कोरिया कलेक्टर रोक्तिमा यादव ने सोनहत ब्लॉक के सुदूर ग्रामीण अंचलों का दौरा कर और बच्चों के साथ सीधा संवाद स्थापित कर संवेदनशीलता व कुशल नेतृत्व की एक बेहतरीन मिसाल पेश की है। उनके इस सहज और प्रेरणादायी अंदाज की हर तरफ सराहना हो रही है।


रामगढ़ स्थित माध्यमिक शाला और कन्या आश्रम शाला के निरीक्षण के दौरान एक अद्भुत और गौरवपूर्ण पल तब आया, जब कक्षा आठवीं की एक छात्रा ने कलेक्टर से बेझिझक सवाल किया कि ‘यूपीएससी की तैयारी के लिए क्या करना होगा?’ इस छोटी सी बच्ची के ऊंचे इरादों और आत्मविश्वास को देखकर कलेक्टर बेहद प्रभावित हुईं। उन्होंने छात्रा की जिज्ञासा को शांत करते हुए बड़ी आत्मीयता से समझाया कि किसी भी सफलता की शुरुआत बड़े लक्ष्य से होती है। उन्होंने अभी से नियमित अध्ययन, विषयों पर मजबूत पकड़ और रोजाना समाचार पत्र पढ़कर सामान्य ज्ञान मजबूत करने की अनमोल सीख दी।


तीसरी की छात्रा ने सुनाया 26 का पहाड़ा, बच्चों संग खिंचवाई फोटो


निरीक्षण के दौरान प्राथमिक स्कूल की कक्षा तीसरी की एक छात्रा ने जब बेधड़क 26 का पहाड़ा सुनाया, तो कलेक्टर ने खुले दिल से उसकी पीठ थपथपाकर शाबासी दी। कक्षा में एक शिक्षिका की भूमिका निभाते हुए उन्होंने बच्चों से रोचक प्रश्न पूछे और उन्हें जीवन में स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बालिकाओं को पढ़ाई के साथ-साथ खेलकूद और स्वास्थ्य पर भी विशेष ध्यान देने की सलाह देते हुए कहा कि प्रतिभा किसी क्षेत्र, संसाधन या परिस्थिति की मोहताज नहीं होती।


रसोई में जाकर परखा मध्यान्ह भोजन, गुणवत्ता बनाए रखने के निर्देश
बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति संजीदगी दिखाते हुए कलेक्टर खुद रसोई कक्ष पहुंचीं और वहां तैयार किए जा रहे मध्यान्ह भोजन का स्वाद चखा। भोजन की गुणवत्ता पर गहरी संतुष्टि जताते हुए उन्होंने प्रबंधन को नियमित रूप से दाल, हरी सब्जियां और सलाद उपलब्ध कराने के कड़े निर्देश दिए। उन्होंने बच्चों के साथ जमीन पर बैठकर मध्यान्ह भोजन किया, जिससे बच्चों के चेहरे ख़ुशी से खिल उठे। इस दौरान स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय सोनहत की व्यवस्थाओं का भी अवलोकन किया गया।

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