
जनकपुर/एमसीबी | बाल विवाह जैसी सामाजिक कुप्रथा को जड़ से मिटाने के लिए पुलिस प्रशासन और महिला एवं बाल विकास विभाग ने कमर कस ली है। “बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़” अभियान के तहत गुरुवार को जनकपुर में एक भव्य जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें पुलिस अधीक्षक (SP) श्रीमती रत्ना सिंह ने स्वयं कमान संभालते हुए समाज को एक सशक्त और कड़ा संदेश दिया।
वर्दी का मानवीय चेहरा: एसपी ने समझाया कानून और सरोकार
कार्यक्रम की सबसे प्रभावशाली कड़ी थाना परिसर जनकपुर में एसपी रत्ना सिंह का संबोधन रहा। पुलिसिंग के सख्त पहलुओं के साथ-साथ उनके मानवीय और संवेदनशील दृष्टिकोण की उपस्थित जनसमूह ने जमकर सराहना की।

एसपी सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि:
“बाल विवाह केवल एक सामाजिक बुराई नहीं, बल्कि बच्चों के सुनहरे भविष्य के विरुद्ध अपराध है। पुलिस प्रशासन इस मामले में ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाएगा। हम केवल कार्रवाई ही नहीं करेंगे, बल्कि बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए एक ढाल बनकर खड़े होंगे।”
उन्होंने युवाओं और अभिभावकों से सीधा संवाद करते हुए आह्वान किया कि वे इस कुप्रथा को जड़ से उखाड़ने के लिए पुलिस के कान और आंख बनें।

प्रशासन और जनशक्ति का अनूठा संगम
सामुदायिक भवन में आयोजित मुख्य सत्र के दौरान जनपद अध्यक्ष श्री माया प्रताप सिंह, उपाध्यक्ष श्री हीरालाल मौर्य और जिला पंचायत सदस्य श्रीमती अनीता चौधरी ने भी पुलिस और प्रशासन के इस साझा प्रयास को सराहा। वक्ताओं ने कहा कि जब जिले की कमान संभाल रहे पुलिस अधिकारी स्वयं सड़कों और समुदायों के बीच जाकर जागरूक करते हैं, तो समाज में कानून के प्रति विश्वास बढ़ता है।
युवाओं और महिलाओं ने ली सुरक्षा की शपथ
कार्यक्रम में चाइल्डलाइन, परियोजना अधिकारी और थाना प्रभारी ने कानूनी बारीकियों पर चर्चा की। इस दौरान आईटीआई और शासकीय नवीन कॉलेज के छात्र-छात्राओं सहित भारी संख्या में उपस्थित मितानिनों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने हाथ उठाकर ‘बाल विवाह मुक्त समाज’ बनाने का संकल्प लिया।
क्षेत्रीय नागरिकों का कहना है कि एसपी रत्ना सिंह के नेतृत्व में पुलिस अब केवल अपराध नियंत्रण तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक सुधार के अभियानों में भी अग्रणी भूमिका निभा रही है। जनकपुर का यह अभियान इस बात का प्रमाण है कि सशक्त पुलिसिंग और जन-भागीदारी से किसी भी कुप्रथा को समाप्त किया जा सकता है।
