
कोरिया। जिले की जीवनदायिनी हसदेव नदी के उद्गम स्थल (ग्राम मेडरा) के संरक्षण, संवर्धन और इसे एक प्रमुख पर्यटन व आस्था केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए प्रशासनिक अमले ने जमीन पर उतरकर अनूठी पहल की है। कलेक्टर रोक्तिमा यादव ने जिला स्तरीय अधिकारियों के साथ उद्गम स्थल का गहन निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने ग्रामीणों के साथ बैठकर सीधे बातचीत की और इस प्राकृतिक विरासत को सहेजने के लिए उनके बहुमूल्य सुझाव लिए।

कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों को नदी संरक्षण की शपथ भी दिलाई गई।
कलेक्टर ने ऐतिहासिक स्थल को नई पहचान देने के लिए पंचायत, वन और जल संसाधन विभाग की एक संयुक्त समिति गठित कर सर्वसम्मति से विकास प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान जिला पंचायत सीईओ डॉ. आशुतोष चतुर्वेदी ने कहा कि हसदेव नदी की पहचान पूरे प्रदेश और देश में है, इसलिए इसके विकास में जनसहभागिता बेहद जरूरी है।

नदियों के ऐतिहासिक महत्व का होगा दस्तावेजीकरण
प्रशासनिक अमले ने जल संसाधन, वन और खनिज विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि जिले से उद्गम होने वाली सभी नदियों के ऐतिहासिक महत्व का दस्तावेजीकरण किया जाए। साथ ही स्थानीय स्कूली बच्चों को यहाँ शैक्षणिक भ्रमण पर लाया जाए ताकि नई पीढ़ी में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़े।

विभिन्न योजनाओं से तैयार होगी कार्ययोजना
कलेक्टर ने कैचमेंट क्षेत्र में वृहद वृक्षारोपण, वाटर रिचार्जिंग और आवश्यक जल संरचनाओं के निर्माण के लिए मनरेगा, डीएमएफ, कैम्पा और वीबीजीआरएएम जैसी योजनाओं को मिलाकर एक मजबूत कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने क्षेत्र में कचरा व अपशिष्ट फेंकने पर रोक लगाने के लिए नियमित निगरानी रखने को कहा। इस अवसर पर जल संसाधन विभाग के कार्यपालन अभियंता ए. टोप्पो ने नदी संरक्षण और जल प्रबंधन के तकनीकी पहलुओं की जानकारी साझा की।
