ज्ञान के साथ व्यवहार कुशलता भी जरूरी: जनकपुर कॉलेज में भारतीय ज्ञान परंपरा पर राष्ट्रीय मंथन

राष्ट्रीय संगोष्ठी: प्राचीन भारत की वैज्ञानिक प्रवृत्ति और आधुनिक शिक्षा के समन्वय पर जोर

डिजिटल चुनौती: ओएसडी अतुल वर्मा बोले- शिक्षक जब खुद पढ़ेंगे, तभी छात्र पढ़ेंगे



जनकपुर/ एम सी बी -शासकीय नवीन महाविद्यालय जनकपुर में ‘राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा गुणवत्ता उन्नयन अभियान’ के अंतर्गत एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया। *“भारतीय ज्ञान प्रणाली:* प्राचीन भारत में वैज्ञानिक प्रवृत्ति” विषय पर केंद्रित इस संगोष्ठी में शिक्षाविदों ने डिजिटल युग में शिक्षा के बदलते स्वरूप और शिक्षक की भूमिका पर गंभीर मंथन किया।


शिक्षक की प्रतिबद्धता से ही संभव है विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास
मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय के विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी अतुल कुमार वर्मा ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में कहा कि शिक्षक केवल ज्ञान का स्रोत नहीं, बल्कि शिष्य को सामाजिक और व्यावहारिक बनाने वाला मार्गदर्शक है। उन्होंने जोर देकर कहा, “आज के डिजिटल युग में सबसे कठिन कार्य स्वाध्याय है। यदि शिक्षक स्वयं नियमित रूप से अध्ययन नहीं करेंगे, तो वे विद्यार्थियों से बेहतर परिणाम की अपेक्षा नहीं कर सकते।” उन्होंने शिक्षकों से स्वयं को स्वाध्याय के प्रति प्रतिबद्ध करने का आह्वान किया।



प्राचीन भारतीय ज्ञान और वैज्ञानिक दृष्टिकोण

विशिष्ट वक्ता डॉ. सुभाष चंद्र चतुर्वेदी ने भारत की प्राचीन बौद्धिक समृद्धि पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हमारी जिम्मेदारी ही हमारा धर्म है। उन्होंने ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ के मूल्यों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से जोड़कर प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. चार्ल्स वर्गीज (अमरकंटक विश्वविद्यालय) ने भी प्राचीन अनुसंधान परंपरा की आधुनिक प्रासंगिकता पर विस्तार से प्रकाश डाला।



शोध पत्रों के माध्यम से हुआ ज्ञान का आदान-प्रदान

महाविद्यालय के प्राचार्य एवं संरक्षक डॉ. अवनीश कुमार पटेल की अध्यक्षता में आयोजित इस सत्र में विभिन्न महाविद्यालयों के विद्वानों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। इनमें डॉ. प्रदीप कुमार सिंह, डॉ. धनसाय देवांगन, बी.एल. सोनवानी, ऋषभ बोरकर और डॉ. परमानन्द शामिल रहे।



कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों और शोधार्थियों को भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रति जागरूक करना था।

इनकी रही गरिमामयी उपस्थिति
संगोष्ठी के सफल आयोजन में संयोजक डॉ. विनीत कुमार पाण्डेय एवं सह-संयोजक हेमंत बंजारे की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कार्यक्रम में महावीर पैकरा, युवराज सिंह जगत, आशुतोष वर्मा, डॉ. अजय पटेल सहित महाविद्यालय का समस्त शैक्षणिक एवं अशैक्षणिक स्टाफ तथा भारी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।



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: राष्ट्रीय सेमिनार, भारतीय ज्ञान प्रणाली, उच्च शिक्षा, नवीन महाविद्यालय जनकपुर।

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