डाकिया घंटी बजाकर दस्तक देता था   साथ लाता था भरोसा, अपनापन और यादें एक दस्तावेज में….

50 साल पुरानी भारतीय डाकघर की रजिस्ट्री को अलविदा “बाय… बाय… रजिस्ट्री!” एमसीबी।कभी हमारे रिश्तों, सरकारी दस्तावेज़ों और विश्वास का सबसे सस्ता और भरोसेमंद माध्यम रही भारतीय डाक की रजिस्ट्री…

Other Story

error: All Content in News 7x24 are protected, Don\'t Try to copy !!