
बिजुरी। भारतीय रेलवे की ‘अमृत भारत स्टेशन योजना’ के तहत बिजुरी रेलवे स्टेशन के कायाकल्प का कार्य इन दिनों युद्ध स्तर पर जारी है। लेकिन विकास की इस दौड़ में निर्माण एजेंसी की लापरवाही यात्रियों और रेल कर्मचारियों के लिए बड़ी मुसीबत बन गई है। वर्तमान में टिकट खिड़की के ठीक बाहर पत्थर काटने की मशीन (कटर) बेधड़क चलाई जा रही है, जिससे निकलने वाली आवाज और उड़ती धूल ने स्टेशन परिसर रेल कर्मचारी ओर यात्रियों को परेशान कर दिया है।

संवादहीनता का शिकार हो रहे यात्री और कर्मचारी
मशीन के अत्यधिक शोर के कारण टिकट काउंटर पर गंभीर स्थिति निर्मित हो रही है। टिकट लेने पहुँच रहे यात्रियों की आवाज भीतर बैठे रेलवे कर्मचारी तक नहीं पहुँच पा रही है। शोर इतना अधिक है कि यात्रियों को चिल्लाकर अपनी बात रखनी पड़ रही है, जिसके चलते काउंटर पर अक्सर गहमागहमी और विवाद की स्थिति बन सकती है।

सेहत और कपड़ों पर भारी पड़ रही लापरवाही
पत्थर की कटिंग से उड़ने वाली बारीक डस्ट न केवल यात्रियों के फेफड़ों और आंखों को नुकसान पहुँचा रही है, बल्कि उनके साफ-सुथरे कपड़े भी खराब कर रही है। टिकट काउंटर के आसपास खड़े यात्रियों के लिए वहां कुछ मिनट बिताना भी दूभर हो गया है।
शिकायत पर ‘शटडाउन’, जाते ही फिर वही हाल
यात्रियों का आरोप है कि ठेकेदार के कर्मचारी सुरक्षा मानकों और जनसुविधा को ताक पर रखकर काम कर रहे हैं। जब यात्री विरोध दर्ज कराते हैं, तो कुछ देर के लिए मशीन बंद कर दी जाती है, लेकिन यात्रियों के हटते ही दोबारा कटिंग शुरू कर दी जाती है। स्टेशन परिसर में ठेकेदार के कर्मचारियों द्वारा इसी तरह की मनमानी की जा रही है।
वर्जन
“स्टेशन पर अमृत भारत योजना के तहत विकास कार्य ठेकेदार के माध्यम से कराए जा रहे हैं। यात्रियों और कर्मचारियों को हो रही असुविधा की जानकारी मिलते ही तुरंत मशीन बंद कराने के निर्देश दिए गए हैं। हमारा प्रयास है कि विकास कार्य के दौरान आमजन को परेशानी न हो।”
— शुभम वर्मा, स्टेशन मास्टर, बिजुरी
